कुछ नहीं बदला - Kuch Nahin Badla


आज सड़क से निकला तो तेरी याद आई 
कुछ नहीं बदला है अब भी
अब भी उन सड़कों के सीने पे उदास से टायर लिपटते हैं
अब भी बारिश होती है लेकिन 
भीगा नहीं पाती शीशों के लबों को
खुद भीग जाते हैं वो अपने बोझिल अश्कों से
और तकते रहते हैं मेरी बगल वाली खाली सीट को
और वो सीट बेल्ट अब भी तरसती है 
तुझसे लिपट जाने को तेरी खुशबू पाने को

photo credit: Go-tea 郭天 Relax via photopin (license)

सोनी - Soni


जब मैं अपने लबों के गुलाब तेरे कानों में रखकर
तुझे आवाज़ दूंगा सोनी, सोनी
तेरी मदहोश पलकें उठेंगी तो फलक पर सूरज अंगडाई लेगा
और किरणें बेताब हो जाएंगी तेरे खुदाई जिस्म से नहाने को

जब मेरे लबों की चहकती शरारतें 
तेरे सोंधे तन से टकराएंगी
तो पत्ते कांप के सर्सरायेंगे और वो 
निथरी ओंस जिसे सजा के बैठे थे माथे पे
झरझरा के समा जायेगी तेरे हुस्न के सजदे में

जमीं पर जब तेरे निथरे कदम पड़ेंगें सोनी
दरख्तों पर उंघते परिंदे जागेंगे तेरी आहट से
अपने सिकुड़े पंखों की शिकन मिटा चल पड़ेंगे परवाज़ लेने 
कायनात चलने लगेगी तेरे एक इशारे पर

जब नींद से छलकती तेरी पलकें झुकेंगी
तो शाम हो जायेगी जमीं पर
जुगनू जल उठेंगे दूधिया उजाला लिए
चाँद गश्त करता रहेगा जब तक
जब तक नये सवेरे में फिर
अपने लबों के गुलाब तेरे कानों में रखकर
फिर मैं तुझे आवाज़ दूंगा सोनी, सोनी

photo credit: Flat White Guy Random stranger via photopin (license)

चाय के प्याले - Chay Ke Pyaale

चाय के प्याले - Chay Ke Pyaale

अदरक-ए -खुशबू का नशा काबू में रखना "प्रदीप"
चाय के प्यालों में जहर बिक रहा आजकल

पत्थर हूँ मैं - Pathar Hun Mein

पत्थर हूँ मैं - Pathar Hun Mein

पत्थर हूँ मैं
ना धर्म है कुछ मेरा 
ना मुझे दर्द होता
पड़ा रहता हूँ कहीं भी
पत्थर हूँ मैं

कभी किसी अबला नारी के तन पर
कभी सैनिकों के माथे पर
कभी गरीब के नंगे पैरों पर
दर्द पहुंचाता हूँ मैं
पत्थर हूँ मैं

कभी मदिरों में कभी मस्जिदों में
कभी गिरजों मैं कभी शिवालों में
लग जाता हूँ कहीं भी दीवालों मैं
भगवान् बन जाता हूँ मैं
पत्थर हूँ मैं

कभी समंदर की लहरों से
कभी नदी के किनारों से
कभी हवा के थपेड़ों से
कभी शायरों की शब्दों से
टकराता रहता रहता हूँ मैं
पत्थर हूँ मैं
पत्थर हूँ मैं
पत्थर हूँ मैं

छल कपट - Chhal Kapat

छल कपट - Chhal Kapat

इस कदर माहिर है छल कपट में
लगती शकुनी का अवतार है 
जमीन के ऊपर इतनी महाभारत ना रच
कि जब जाए जमीन के नीचे तो सुकून ना मिले

सुन विनती शिव मेरी - Sun Vintee Shiv Meri

सुन विनती शिव मेरी - Sun Vintee Shiv Meri

हे
शिव
महादेव
महाकाल

महेश्वर, शम्भू, पिनाकी, शशिशेखर, वामदेव, विरूपाक्ष
कपर्दी, नीललोहित, शंकर, शूलपाणी, खटवांगी, विष्णुवल्लभ
शिपिविष्ट, अंबिकानाथ, श्रीकण्ठ, भक्तवत्सल, भव, शर्व
त्रिलोकेश, शितिकण्ठ, शिवाप्रिय, उग्र, कपाली, कामारी
अंधकारसुरसूदन, गंगाधर, ललाटाक्ष, कालकाल, कृपानिधि
भीम, परशुहस्त, मृगपाणी, जटाधर, कैलाशवासी, कवची
कठोर, त्रिपुरांतक, वृषांक, वृषभारूढ़, भस्मोद्धूलितविग्रह
सामप्रिय, स्वरमयी, त्रयीमूर्ति, अनीश्वर, सर्वज्ञ, परमात्मा
सोमसूर्याग्निलोचन, हवि, यज्ञमय, सोम, पंचवक्त्र, सदाशिव
विश्वेश्वर, वीरभद्र, गणनाथ, प्रजापति, हिरण्यरेता, दुर्धुर्ष
गिरीश, गिरिश, अनघ, भुजंगभूषण, भर्ग, गिरिधन्वा
गिरिप्रिय, कृत्तिवासा, पुराराति, भगवान्, प्रमथाधिप
मृत्युंजय, सूक्ष्मतनु, जगद्व्यापी, जगद्गुरू, व्योमकेश
महासेनजनक, चारुविक्रम, रूद्र, भूतपति, स्थाणु, अहिर्बुध्न्य
दिगम्बर, अष्टमूर्ति, अनेकात्मा, सात्त्विक, शुद्धविग्रह, शाश्वत
खण्डपरशु, अज, पाशविमोचन, मृड, पशुपति, देव
अव्यय, हरि, पूषदन्तभित्, अव्यग्र, दक्षाध्वरहर, हर, भगनेत्रभिद्
अव्यक्त, सहस्राक्ष, सहस्रपाद, अपवर्गप्रद, अनंत, तारक
परमेश्वर

तुझे मेरी भक्ति की सौगंध
या तो मेरा दर्द कम कर दे
या फिर खोल तीसरा नेत्र और भस्म कर दे

सिंदूर - Sindoor

सिंदूर  - Sindoor

जो भरा था अरमानो का सिंदूर तेरी मांग में
तूने धोया उसे होली का रंग जानकर